school की शुरुआत भारत मै कब और केसे हुई और भारतीय शिक्षा का इतिहास क्या है ?

 स्कूल की शुरुआत भारत मै बहुत पहले हो गयी थी स्कूल को पाठशाला भी कहा जाता है जिसकी शुरुआत प्रचीन काल से भारत मै हो गयी थी उसके बाद स्कूल की तदात देश भर मै बढ़ेने लगी । 

आधिकारिक तोर पर स्कूल की शुरुआत अंग्रेज़ो के टाइम से हो गयी थी जब पहली बार अंग्रेज़ो ने कोलकता मै स्कूल को खोला था ऐसा  नहीं था की इस से पहले भारत मै कोई स्कूल नहीं था इस  से पहले भी भारत मै स्कूल थे जिनको मठ कहा जाता था लेकिन वो किसी के घर मै होता था या कोई गुरु होता था सकरी तोर पर पहले स्कूल नहीं होते थे । 

भारतीय शिक्षा का इतिहास  क्या है ?


भारत बर्ष मै पहले गुरुकुल होते थे जिनहे गुरु चलाया करते थे यही शुरू के दोर मै स्कूल होते थे लेकिन बाद मै जेसे अंग्रेज़ भारत मै आए तो उन्होने यनहा स्कूल खोलने भी शुरुकर दिये थे । 

भारत का पहला सरकारी स्कूल 1817 मै अंग्रेज़ो द्वारा कोलकाता , west bengal मै खोला गया था यह एक हिन्दू स्कूल था  , 

1 जनवरी 1848 मै पहला महिला स्कूल खोला गया था यानि की यह भारत का पहल स्कूल था जो केवल लड़कियो के लिए था लेकिन उस टाइम लड़कियो को शिक्षा देना बहुत ही मुश्किल था । 

school यानि की जनहा कोई शिक्षा का ग्रहण करता है कुछ सीखता है आज के स्कूल मै और पहले के स्कूल मै बहुत जायदा फर्क है  

स्कूल मै शिक्षा के साथ ही बचे का शारीरिक और मानसिक विकास भी किया जाता है ताकि उसकी बुद्धि के विकास के साथ 2 शरीर का भी सही रूप मै विकास हो । 


स्कूल का इतिहास -

स्कूल से पहले भारत मै गुरु कुल हुआ करते थे  भारत मै स्कूल की शुरुआत अंग्रेज़ो ने की थी पर उस से पहले भी भारत मै शिक्षा दी जाती थी वो शिक्षा गुरु के द्वारा गुरुकुल मै होती थी यानि पहले भारत मै गुरुकुल होते थे उन गुरकुल मै हर कोई भी पढ़ नहीं सकता था । 

जेसा आप आज देखते है की हर कोई हर किसी का लड़का स्कूल मै पीडीएच सकता है पर ऐसा नहीं था उस टाइम मै या तो राजा का बेटा किसी ऊंचे खानदान का बेटा किसी गुरु का जिमीदार का यानि की जो समाज का उच वर्ग था वही गुरु कुल मै शिक्षा लेने जा सकता था और लड़कियो को भी उस टाइम मै नहीं पढ़ाया जाता था । 

शुरू के टाइम मै स्कूल यानि पाठशाला गुरु के घर मै ही होते थे उसके लिए कोई अलग से स्कूल नहीं होता था  सबको ही गुरु के घर पर शिक्षा लेने जाना पढ़ता था । 

जब भारत मै मुगलो का जमाना था  तो बचो को शिक्षा देने के लिए मदरसो का निर्माण किया गया था उस टाइम मै किसी भी जगह गाओ मै एक स्कूल एक मंदिर एक मशजीद का होना ज़रूरी था इन मै हर एक चीज के बारे मै सिखाया जाता था जिन मै मुखय तोर पर कानून , खगोल , आचार विचार, विज्ञान , जीव आदि के बारे मै सिखाया जाता था । 

जेसे जेसे भारत मै अंग्रेज़ो ने राज किया तो उन्होने भारत मै मिशनरी स्कूल भी खोले और साथ मै ही हिन्दू  और मुस्लिम के लिए भी स्कूल खोले । 

आज भी भारत मै अंग्रेज़ो द्वारा चलाये गए स्कूल है और वे चल रहे है और आज भी उन स्कूल मै हमारे बच्चे पढ़ते है । 

शिक्षा काया है ? 

किसी भी ज्ञान को प्राप्त करना  किसी भी skill या काम को सीखना आदि चीजों को हम शिक्षा के अंदर ले सकते है , शिक्षा इंसान को एक बेहतरीन और अच्छा मनुष्य बनती है । 

शिक्षा इंसान को मानसिक और शारीरिक तोर पर भी मजबूत बनती है और आज के युग मै हम कह सकते है शिक्षा आदमी को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनती है । 

शिक्षा एक ऐसा प्रयास है जिसको जितना सीख लो आप दूसरों मै बाँट सकते है और यह बांटने से बढ़ेगी आप इस को अपनी निचली पीढ़ी को दे सकते है यानि की जो आके बाद पीढ़ी आएगी उसको आप अपनी शिक्षा दे सकते है । 
समाज को आपस मै जोड़ने के लिए शिक्षा का हीना बहुत ज्यादा ज़रूरी है एक बच्चा शिक्षा के द्वारा अपने गुरु से बहुत कुछ सिखाता है समाज मै केसे रहना है समाज के नियम कानून क्या है आदि । 
साथ मै एक इंसान समाज से जुड़ना सीखा जाता है । 

भारतीय शिक्षा का इतिहास -

भारतीय शिक्षा  का इतिहास भी बहुत पुराना है जितना की भारतीय स्कूल का इतिहास है शिक्षा का इतिहास उस से भी पुराना है । 

स्कूल तो शुरू मै गुरुकुल थे इसका मतलब ये नहीं की गुरुकुल के पहले शिक्षा नहीं  दी जाती थी ज़रूरी नहीं शिक्षा मै सारी ज्ञान की बाते पढ़ने लिखने की बाते आती है एक बचा जब अपने माँ पिता से बोल्न सीखता है वो भी एक शिक्षा का रूप है । 

यह एक एसी शिक्षा है जिसको की कोई भी इंसान सबसे पहले सिखाता है जब किओ भी गुरुकुल नहीं था तब भी इंसान शिक्षा लेता था इस से यह साबित हो जाता है की स्कूल से पुराना शिक्षा का इतिहास है । 

भारत मै पहले तो गुरु कुल ही होते थे और उन कुलो मै सभी को शिक्षा नहीं मिल पति थी अंग्रेज़ो ने उन गुरु कुलो को धीरे धीरे बंद किया और अपने कान्वेंट स्कूल का प्रारम्भ किया जिस से बाद मै सभी शिक्षा लेने लगे भारत मै पहले से ही शिक्षा नीति ठीक नहीं थी लड़कियो को स्कूल मै नहीं पढ़ाया जाता था । 
जब बाद मै कान्वेंट स्कूल और प्राइवेट स्कूल खोले जाने लगे तो लड़कियो को शिक्षा लेने का अधिकार हुआ था । 


प्रचीन काल -

आइये कुछ नज़र डालते है प्रचीन काल की शिक्षा के इतिहास पर प्रचीन काल  मै हम यानि की हमारे पूर्वज सभी चीजों के लिए अपने उपर ही आत्म निर्भर थे । 

प्रचीन काल  मै भी भारत मै शिक्षा को बहुत महत्व दिया गया था बस फर्क इतना था की उस काल मै लड़कियो की शिक्षा पर कोई खास धायन नहीं दिया जाता था । उस समय पर भी भारत विश्व गुरु कहलाता था । 

प्रचीन काल  मै वेदो के मधाम से शिक्षा दी जाती थी उस टाइम मै वेद का बहुत ही महत्व हुआ करता था आज के बहुत से बच्चो को इस वेदो के बारे मै भी ज्ञान नहीं होगा उस टाइम मै इनही वेदो से शिक्षा होती थी । 

मध्य काल -

मध्य काल  मै भारत मै मुस्लिम लोगो ने राज किया था यह अंग्रेज़ो के टाइम से पहले का काल था जब भारत मै मुगलो का राज हुआ करता था । 

मुगलो के राजके साथ ही देश मै इस्लामी शिक्षा का बी विस्तार होने लगा था जो इंसान उस टाइम मै फारसी जानते थे उन्हे ही सरकारी काम मिलते थे उसके बाद हिन्दू भी फारसी और उर्दू को सीखने लगे उस से उनको भी काम के योगी समझा जाता था । 

मध्य काल मै शासक मुस्लिम थे तो उन्होने अपने राज मै मुस्लिम शिक्षा का ही विस्तार किया और उनकी रुचि भी इसी शिक्षा मै थी और देश मै उनके तरीके से ही शिक्षा दी जाने लगी । 

मध्य काल मै मकबरे बने और मदरसो का निर्माण किया गया ज्न्ह पर मुस्लिम शिक्षा दी जाने लगी थी । 
इस काल मै शिक्षक को बड़ी समान की नज़र से देखा जाता था और राजाओ के बेटो को महल के अंदर ही शिक्षा दी जाती थी । 

आधुनिक काल -

मुगलो के शासन के बाद भारत मै अंग्रेजो का राज हुआ जब अंग्रेज़ भारत मै आए तो उन्होने धीरे 2 भारत मै शिक्षा का प्रचार किया और स्कूल खोले । 
अंग्रेज़ो ने भारत मै पहले कान्वेंट स्कूल खोले उसके बाद हिन्दी स्कूल भी अंग्रेज़ो ने भारत मै खोले और साथ मै बहुत से collage का निर्माण भी अंग्रेज़ो ने भारत मै किया । 

अंग्रेज़ो के स्कूल मै ईसाई धर्म की शिक्षा तो दी  ही जाती थी और इसके साथ ही भूगोल , गणित , अँग्रेजी , इतिहास सहितय आदि की शिक्षा भी दी जाने लगी । 






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